सट्टा मटका का इतिहास: 1960 के दशक से लेकर आज के डिजिटल गली-दिसावर तक
सट्टा मटका का इतिहास किसी दिलचस्प थ्रिलर फिल्म की कहानी से कम नहीं है। 1960 के दशक में मुंबई में रुई (कपास) के भावों पर दांव लगाने से शुरू हुआ यह खेल, आज गली-दिसावर और स्मार्टफोन के जरिए एक विशाल डिजिटल बाज़ार में बदल चुका है। ' Satta King ' के उदय से लेकर पुलिस की भारी छापेमारी और आज के हाई-टेक स्वरूप तक, इस गैर-कानूनी खेल का सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है। शुरुआत : 1960 का दशक और कपास का व्यापार Satta Matka की कहानी आज से नहीं, बल्कि आज़ादी के कुछ समय बाद ही शुरू हो गई थी। 1960 के दशक में , लोग न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज (New York Cotton Exchange) से बॉम्बे कॉटन एक्सचेंज (Bombay Cotton Exchange) में आने वाले कपास (Cotton) के खुलने और बंद होने के दामों (Rates) पर दांव लगाते थे। यह जानकारी टेलीप्रिंटर के माध्यम से आती थी और सटोरिए इसी के आधार पर जीत - हार तय करते थे। लेकिन 1961 में न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज ने इस प्रथा पर रोक लगा दी। अब सट्टेबाजों को पैसे लगाने का एक नया तरीका खोजना था , और यहीं से मटका ...